વતર્માનકાળના રૂપો
17ઓક્ટોબર
વતર્માનકાળ(દ્વિતીય ગણ સમૂહ)
ગણ-૨,૩,૫,૭,૮,૯ આ છ ગણોના સમૂહને દ્વિતીય ગણ-સમૂહમાં
અથવા ગણકાર્યરહિત કાળ કહીશું
चि(ગણ-૫)(પરસ્મૈપદ)(ઉભયપદ)એકઠું કરવુ
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | चिनोमि | चिनुवः | चिनुमः |
મ.પુ | चिनोसि | चिनुथः | चिनुथ |
અ.પુ | चिनोति | चिनुतः | चिन्तन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | चिन्वे | चिनुवहे | चिनुमहे |
મ.પુ | चिनुषे | चिन्वाथे | चिनुध्वे |
અ.પુ | चिनुते | चिन्वति | चिन्वते |
आम् -(ગણ-૫) (પરસ્મૈપદ) મેળવવું
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | आप्नोमि | आप्नुवः | आप्नुमः |
મ.પુ | आप्नोसि | आप्नुथः | आप्नुथ |
અ.પુ | आप्नोति | आप्नुतः | आप्नुवन्ति |
कृ-( ગણ-૮)(ઉભયપદ)કરવું
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | करोमि | कुर्वः | कुर्मः |
મ.પુ | करोसि | कुरुथः | कुरुथ |
અ.પુ | करोति | कुरुतः | कुरुन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | कुर्वे | कुर्वहे | कुर्महे |
મ.પુ | कुरुषे | कुर्वाथे | कुरुध्वे |
અ.પુ | कुरुते | कुर्वाते | कुर्वते |
तन्-ફેલાવવું (ગણ-૮) (ઉભયપદ)
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | तनोमि | तनुवः | तनुमः |
મ.પુ | तनोसि | तनुथः | तनुथ |
અ.પુ | तनोति | तनुतः | तन्वन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | तन्वे | तनुवहे | तनुमहे |
મ.પુ | तनुषे | तन्वाथे | तनुध्वे |
અ.પુ | तनुते | तन्वाति | तन्वते |
ज्ञा – (जा)(ગણ-૯ ઉભયપદ) જાણવું
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | जानामि | जानीवः | जानीमः |
મ.પુ | जानासि | जानीथः | जानीथ |
અ.પુ | जानाति | जानीतः | जानन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | जाने | जानीवहे | जानीमहे |
મ.પુ | जानीषे | जानाथे | जानीध्वे |
અ.પુ | जानीते | जानाति | जानते |
या – જવું (ગણ-૨)(પરસ્મૈપદ)
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | यामि | यावः | यामः |
મ.પુ | यासि | याथः | याथ |
અ.પુ | याति | यातः | यान्ति |
ब्रू – બોલવું/ કહેવું (ગણ-૨)(ઉભયપદ)
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | ब्रवीमि | ब्रूवः | ब्रूमः |
મ.પુ | ब्रवीसि | ब्रूथः | ब्रूथ |
અ.પુ | ब्रवीति | ब्रूतः | ब्रूवन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | ब्रूवे | ब्रुवहे | ब्रुमहे |
મ.પુ | ब्रूथे | ब्रुवाथे | ब्रुध्वे |
અ.પુ | ब्रूते | ब्रुवाति | ब्रुवते |
रुध् – રોકવું (ગણ-૭)(ઉભયપદ)
વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | रुणध्मि | रुन्ध्वः | रुन्ध्मः |
મ.પુ | रुणत्सि | रुन्ध्दः | रुन्ध्द |
અ.પુ | रुणध्दि | रुन्ध्दः | रुन्धन्ति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | रुन्धे | रुन्ध्वहे | रुन्ध्महे |
મ.પુ | रुन्त्से | रुन्धाथे | रुन्द्ध्वे |
અ.પુ | रुन्ध्दे | रुन्धाते | रुन्धते |
दा – આપવું (ગણ-૩) (ઉભયપદ) વર્તમાનકાળ (પરસ્મૈપદ)
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | ददामि | दद्व | दद्म |
મ.પુ | ददासि | दत्थः | दत्थ |
અ.પુ | ददाति | दत्तः | ददति |
આત્મનેપદ
એ.વ | દ્વિ.વ | બ.વ | |
ઉ.પુ | ददे | दद्वहे | दद्महे |
મ.પુ | दत्से | ददाथे | दद्ध्वे |
અ.પુ | दत्ते | ददाते | ददते |
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